बिलासपुर

पानी में डूबा जनता का विश्वास, स्मार्ट सिटी नहीं ‘डूबापुर’ बन गया है बिलासपुर: शैलेश पांडेय

पानी में डूबा जनता का विश्वास, स्मार्ट सिटी नहीं ‘डूबापुर’ बन गया है बिलासपुर: शैलेश पांडेय

थोड़ी सी बारिश ने खोली नगर निगम और स्मार्ट सिटी के करोड़ों के सफाई दावों की पोल

 

विधायक और महापौर जनता की तकलीफों से गायब, वीआईपी क्षेत्रों में ही लगायी जा रहीं पानी निकासी की मशीनें

 

बिलासपुर।पूरे शहर में हुई भारी बारिश के बाद उपजे भयंकर जलभराव की स्थिति पर पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने नगर निगम प्रशासन और सत्तापक्ष को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “बिलासपुर आज स्मार्ट सिटी नहीं, बल्कि ‘डूबापुर बिलासपुर’ बन गया है। थोड़ी सी बारिश ने नगर निगम, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और करोड़ों रुपये के सफाई कार्यों की कागजी सच्चाई जनता के सामने ला दी है। जिस सफाई का ढिंढोरा पीटा जा रहा था, वे दावे इस पहली बारिश के पानी में बह गए हैं।”

 

​घरों में तैर रहा सामान, ठप पड़ा है व्यापार

पूर्व विधायक ने प्रभावित क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि आज हालात बेहद चिंताजनक हैं। लोगों के घरों और मोहल्लों में पानी घुस गया है, जिससे कीमती फर्नीचर और घरेलू सामान खराब हो चुके हैं। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जल पाए हैं और घर का सामान पानी में तैरता दिखाई दे रहा है। सड़कें तालाब में तब्दील हो चुकी हैं, यहाँ तक कि न्यायालय के न्यायाधीश के कमरे तक में पानी घुस गया है। पूरा व्यापार ठप है और आम नागरिक भारी परेशानियों का सामना कर रहा है, लेकिन संकट की इस घड़ी में शहर के विधायक और महापौर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं।

 

​खोदापुर के बाद अब बनाया ‘डूबापुर’

वर्तमान विधायक अमर अग्रवाल पर निशाना साधते हुए शैलेश पांडेय ने कहा:

 

“बिलासपुर की जनता ने विकास के बड़े-बड़े दावे सुने थे, लेकिन आज पूरा शहर जलभराव में डूबा हुआ है। यह सिर्फ सड़कों पर जमा पानी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के डूबने का प्रतीक है। पानी ने जनता के भरोसे को धो दिया है। अपने पिछले कार्यकाल में अमर अग्रवाल ने पूरे शहर को ‘खोदापुर’ बनाकर छोड़ा था, और इस बार शहर को ‘डूबापुर’ बना दिया है। पूरे शहर में नाव चलाने जैसी स्थिति बनी हुई है, जो बिलासपुर जैसे शहर के लिए कोई वैभव की बात नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक है।”

 

​जवाबदेही तय करे प्रशासन, मिले तत्काल राहत

उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि शहर की जल निकासी व्यवस्था पहली बारिश भी नहीं झेल पा रही है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन आम जनता को बेसहारा छोड़कर केवल वीआईपी लोगों के घरों से मशीन लगाकर पानी निकालने में व्यस्त है।

 

पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाई जाए, जल निकासी की युद्धस्तर पर व्यवस्था हो और भविष्य में ऐसी शर्मनाक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए एक स्थायी और ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।

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