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करोड़ों के अस्पताल जाने का रास्ता गाँव की सड़क जैसा,कौन बनाएगा…? वर्षों से इंतजार

करोड़ों के अस्पताल जाने का रास्ता गाँव की सड़क जैसा,कौन बनाएगा…? वर्षों से इंतजार

फिजिक्सवाला,बाइक शो-रूम, एनकेएच, कृष्णा हॉस्पिटल, मंगलम विहार कालोनी को जाती है एप्रोच रोड

कोरबा। 24जुलाई :-कोरबा शहर के पॉश इलाका कोसाबाड़ी चौक के निकट संचालित जिले के दो बड़े निजी अस्पतालों और एक बड़ी आवासीय कॉलोनी के साथ-साथ अन्य नामचीन प्रतिष्ठानों के लिए आने-जाने का रास्ता वर्षों से गांव की सड़क से भी बदतर है। हिचकोले देने वाली यह सड़क कभी पक्की बनी ही नहीं, ना तो सीसी रोड बनी और ना ही डामर वाली सड़क, बल्कि कच्ची सड़क मलवा डाल-डाल कर पाटन के बाद और भी खराब हो चुकी है।

आलम यह है कि यहां के दो बड़े अस्पतालों कृष्णा हॉस्पिटल और न्यू कोरबा हॉस्पिटल में जब मरीज को लाया जाता है तो मरीज के साथ-साथ परिजन भी हिचकोले खाते हैं। डिलीवरी पेशेंट को लेकर तो इस बात का डर बना रहता है कि कहीं इन गड्ढों से गुजरते वक्त ही प्रसव ना हो जाए या मरीज की जान पर संकट उत्पन्न हो जाए। इसी प्रकार दूसरे मरीज, खासकर बुजुर्गों,अस्थिरोगियों के लिए भी यह रास्ता हितकर नहीं है। आम आदमी जब इस रास्ते से गुजरता है तो उसकी भी हालत खराब हो जाती है तो भला मरीज की स्थिति क्या होगी, इसे समझा जा सकता है।यह बड़ा ही दुर्भाग्यजनक है कि इस रास्ते के किनारे बड़े-बड़े प्रतिष्ठान और संस्थान संचालित हो रहे हैं। नगर निगम की सीमा क्षेत्र में यह इलाका आता है। दो-दो सरकारें राज्य में और जिले में बदल गईं, फिर भी यह एप्रोच सड़क जस की तस है। लोगों के लिए यह बात समझ से परे है कि करोड़ों के अस्पताल की ओर जाने वाले इस रास्ते को आखिर बनाएगा कौन..? अस्पताल के बगल से मंगलम विहार कॉलोनी विकसित है, कॉलोनी विकास के लिए भी सड़क की आवश्यकता होती है। नगर निगम से तथा प्रशासन की अन्य इकाईयों से अनुमति ली जाती है और शर्तों का पालन भी करना होता है, तो क्या इस मार्ग पर संचालित अस्पतालों से लेकर अन्य प्रतिष्ठानों/संस्थानों के मालिकों और कॉलोनी के डेवलपर द्वारा शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है! सवाल है कि यह सड़क आखिर बनाएगा कौन और बनवाना किसकी जिम्मेदारी है?ऐसा नहीं है कि जिले के प्रशासन तंत्र से जुड़े लोगों का वास्ता इन दोनों अस्पतालों में से किसी भी एक अस्पताल में न पड़ा हो। निगम हो या प्रशासन के अधिकारी उन्हें भी इस बात की पूरी जानकारी है, नेताओं को भी पता है व अन्य जनप्रतिनिधियों को भी मालूम है लेकिन आज तक इस एप्रोच रोड को बनवाने के संबंध में कभी भी कहीं से भी ना तो कोई प्रस्ताव आए हैं और ना ही कोई पहल हुई है।

वर्षों पूर्व एक बार ऐसा जरूर हुआ है जब किसी मरीज के साथ हुई घटना से विचलित होकर एनकेएच के डायरेक्टर डॉ. एस. चांदनी ने सड़क को समतल कराया था लेकिन इसके बाद किसी और ने इस पर ध्यान

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